दरभंगा: भ्रष्टाचार का आरोप। उसके बाद निलंबन और अब शिक्षा विभाग की ओर से मिला सम्मान। जी हां, इसे आप क्या कहेंगे। बिहार के शिक्षा विभाग में कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसकी चर्चा शिक्षा विभाग के गलियारों में हो रही है। शिक्षकों के बीच हो रही है। छात्र भी इस सम्मान की चर्चा कर रहे हैं। हुआ यूं कि दरभंगा के जिला शिक्षा पदाधिकारी समर बहादुर सिंह को शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-वन और टीआरई-टू में अवैध वसूली करने का आरोप लगा। उसके बाद डीईओ को निलंबित कर दिया गया। अब आरोपी डीईओ को 2024 में मैट्रिक परीक्षा के सफल संचालन के लिए पटना में सम्मानित किया गया है।
अवैध वसूली का आरोप
ध्यान रहे कि शिक्षा विभाग ने दरभंगा के डीईओ समर बहादुर सिंह और जिला स्थापना पदाधिकारी डीपीओ रवि कुमार को बेंच- डेस्क निर्माण में घोटाले का आरोपी बनाया। दोनों आरोपियों पर टीआरई- वन और टू परीक्षा में काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों से उगाही का आरोप भी लगा। 28 नवंबर, को इस आरोप की जांच का जिम्मा शिक्षा विभाग के उपनिदेशक को सौंपा गया। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों आरोपी पदाधिकारियों को विभाग ने निलंबित कर दिया।
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आरोपियों का सम्मान
प्रमंडलीय शिक्षा उपनिदेशक की ओर से जब दोनों आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की गई, तब पता चला कि दोनों ने टीआरई-वन और टू के अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की वसूली की। इसके अलावा जिले के स्कूलों में बेंच- डेस्क सप्लाई में जमकर कमाई की। आरोप की पुष्टि होते ही उपनिदेशक की ओर से विस्तृत रिपोर्ट शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ को भेज दी गई। एस सिद्धार्थ ने दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में दोनों को मुख्यालय जन शिक्षा निदेशालय विकास भवन पटना में पदस्थापित कर दिया गया।
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जांच कमेटी का गठन
अचानक, 1 दिसंबर, 2024 को दोनों पदाधिकारियों के पक्ष में एक पत्र जारी किया गया। जिसमें आरोपी समर बहादुर सिंह को मैट्रिक परीक्षा 2024 के कदाचार मुक्त संचालन के लिए सम्मानित करने की बात कही गई। सवाल उठता है कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपी अधिकारी को सम्मान किस हिसाब से दिया गया है। उधर, दरभंगा के जिला शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ विभाग ने घोटाले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमिटी का गठन कर दिया है। इस जांच कमेटी का गठन विभाग के सचिव सतीश चंद्र झा के नेतृत्व में किया गया है। जो आरोपित जिला शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ घोटाले का जांच करेगी। यह जांच कमिटी तीन महीने के भीतर प्रमंडलीय उपनिदेशक दरभंगा को अपना रिपोर्ट सौंप देगी।