बिहार में शिक्षकों के ट्रांसफर से जुड़ी नीतीश सरकार की एक पॉलिसी पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले महीने राज्य में शिक्षकों के लिए नई ट्रांसफर पॉलिसी पेश की थी। सीएम ने कहा था कि यह पॉलिसी BPSC (बिहार लोक सेवा आयोग) के शिक्षकों और कुछ अनिवार्य परीक्षाएं पास करने वाले शिक्षकों पर लागू होगी। हालांकि शिक्षक संघों की याचिका के बाद पटना उच्च न्यायालय ने मंगलवार (19 नवंबर) को इस पॉलिसी पर रोक लगा दी। हम आपको यहां बताएंगे कि यह पॉलिसी क्या है?
क्या है नीतिश सरकार की नई पॉलिसी?
बिहार सरकार के मुताबिक प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए ट्रांसफर पॉलिसी शुरू की गई थी। क्योंकि पिछले कुछ सालों में ज़्यादातर शिक्षक अपने गृह जिलों में काम कर रहे हैं। पीटीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नीति बीपीएससी के माध्यम से नियुक्त सभी शिक्षकों या पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) और शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से भर्ती किए गए और प्रासंगिक योग्यता (सक्षमता) परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी शिक्षकों पर लागू होती है।
शिक्षक संघों ने पॉलिसी को क्यों चुनौती दी?
इस पॉलिसी में अन्य प्रावधानों के अलावा यह प्रावधान था कि एक महिला शिक्षक अपनी गृह पंचायत के अलावा किसी भी पंचायत का विकल्प चुन सकती है, जबकि एक पुरुष शिक्षक को अपने गृह उप-विभाग के अलावा बिहार के किसी भी जिले में किसी भी उप-विभाग का विकल्प चुनना होगा। शिक्षक संघों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया और तर्क दिया कि चूंकि बिहार के 38 जिलों में से आठ में केवल एक उप-विभाग है, इसलिए इसका मतलब यह हो सकता है कि उन शिक्षकों को अपने गृह जिलों से बाहर ट्रांसफर किया जा सकता है। शिक्षकों को और भी कुछ बिन्दुओं पर आपत्ति थी।
जस्टिस प्रभात कुंअर सिंह की अदालत ने 13 शिक्षकों की याचिका पर ‘मास ट्रांसफर’ के फैसले पर रोक लगा दी और राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया। मामले की सुनवाई 21 जनवरी 2025 को होगी।
हाईकोर्ट के स्थगन आदेश पर राज्य सरकार की क्या प्रतिक्रिया रही?
बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि पॉलिसी में कई खामियां हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सभी पांच योग्यता परीक्षण (जिनमें से दो पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं) आयोजित करने के बाद एक नई पॉलिसी लाएगी, जिसे पास करने पर नियोजित शिक्षकों को भी राज्य कर्मचारी का दर्जा मिलेगा।