पटना: राज्य के शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर पहले से ही अनिश्चितता का वातावरण है। उस पर न्यायालय की ओर से स्थानांतरण पर रोक लगाना और इसके आलोक में शिक्षा विभाग के द्वारा स्थानांतरण नीति को स्थगित कर देने के बाद स्थानांतरण के आकांक्षी शिक्षकों की परेशानी और भी बढ़ गई। अब राज्य सरकार ने शिक्षकों के चार कैडर बना कर स्थानांतरण पॉलिसी बनाई है। उसके बाद शिक्षक और भी परेशान हो गए है। पहले जानते हैं कि चार कैडर क्या है?
शिक्षकों के चार कैडर
राज्य सरकार की ओर से शिक्षकों के चार अलग- अलग कैडर बना दिया गया। इनकी नियुक्ति, तबादला का अधिकार अलग- अलग किया गया है। यहां कैडर के अनुसार शिक्षक स्थानांतरण नीति अपनाई जाएगी। ग्रेड पे कैडर- इस कैडर में बहाल होने वाले शिक्षकों का किसी भी स्कूल में तबादला किया जा सकता है। इनका स्थानांतरण जिला शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा किया जा सकता है।
नियोजित शिक्षक कैडर
नियोजित शिक्षक कैडर- नियोजित शिक्षक के लिए विशेष प्रावधान नहीं है। इनका तबादला केवल वही होगा, जहां से उनका नियोजन हुआ है। मसलन ग्राम पंचायत, प्रखंड और कि जिला स्तर पर। बीपीएससी शिक्षक- बीपीएससी शिक्षक का अभी प्रोबेशन पीरियड चल रहा है। इनका राज्य के किसी स्कूल में स्थानांतरण हो सकता है। फिलहाल इनका स्थानांतरण सरकार को विशेष निर्णय के तहत करना है। विशिष्ट शिक्षक- विशिष्ट शिक्षक में वे शिक्षक शामिल हैं जिन्होंने सक्षमता परीक्षा पास की है। इन्हें राज्यकर्मी का दर्जा हासिल है। उनकी बहाली स्थाई नियुक्ति के तहत की गई है।
न्याय संगत नहीं: शैलू
अखिल भारतीय शैक्षिक संघ नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव शैलेन्द्र कुमार शर्मा कहते हैं कि बिहार सरकार और सरकार के शिक्षा विभाग के कुछ शोधार्थी पदाधिकारियों की ओर से शिक्षा, शैक्षणिक व्यवस्था सुधारने के बजाय शिक्षकों की यथास्थिति तो दयनीय है ही और ऊपर से जुल्म और सितम का चाबुक चला रहे हैं, मानो ये बुद्धिजीवी नहीं बल्कि कोल्हू के बैल हैं।
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वर्तमान स्थिति जानिए
शिक्षकों की पदस्थापना की कुव्यवस्था के साथ डोमिसाइल नीति बिल्कुल मनमाने और असंवैधानिक ढंग से लागू किया गया, जो चर्चा का विषय है। बताया जा रहा है कि ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर हाई कोर्ट की फटकार के बाद अब शिक्षा विभाग ने इसे आनन- फानन में तैयार किया है। नई गाइडलाइन और कैडर में बांटना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं लग रहा है। तबादले को इच्छुक शिक्षकों को चार भागों में बांट दिया गया है। जिसमें पति पत्नी, असाध्य रोग से पीड़ित, दिव्यांग के साथ विधवा और परित्यक्ता महिला शिक्षक शामिल हैं।
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सवाल सबसे बड़ा है?
क्या जो शिक्षक और महिला शिक्षक घर से 100, 200 और चार सौ किलोमीटर की दूरी पर किसी स्कूल में पदस्थापित हैं। अपने माता- पिता की इकलौती संतान हैं। क्या उनके लिए प्रावधान नहीं होना चाहिए। शिक्षक समाज पूछना चाहता है कि ऐसे गैर कानूनी और मनमाने रवैये की जांच होनी चाहिए। उसके अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। सीएम को ऐच्छिक स्थानांतरण की व्यवस्था लागू करने का आदेश देना चाहिए। अन्यथा बहुत जल्द इस प्रक्रिया में उगाही का दौर शुरू हो जाएगा।