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शिक्षकों की आपसी लड़ाई में छात्रों का भविष्य अधर में

बिहार में मगध विश्वविद्यालय के भीतर शिक्षकों की आपसी लड़ाई ने छात्रों के भविष्य को अधर में डाल दिया है. राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक मगध विश्वविद्यालय में पढ़ाई छोड़ कर सब कुछ हो रहा है. इस विश्वविद्यालय में पठन-पाठन की क्या स्थिति है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि
विश्वविद्यालयों को ग्रेड देने वाली संस्था नैक की टीम ने अपने निरीक्षण के बाद मगध विश्वविद्यालय को सी ग्रेड दिया. यदि डी ग्रेड मिलता तो मगध विश्वविद्यालय की मान्यता भी समाप्त हो सकती थी. नैक की टीम ने निरीक्षण के बाद मगध विश्वविद्यालय के विभागों में शैक्षणिक माहौल का अभाव, शिक्षकों तथा शोध की बेहद कमी पर तल्ख टिप्पणी की थी. नैक ने यह भी कहा था कि पठन-पाठन का माहौल सबसे अच्छा होना चाहिए. लेकिन इस बात की कमी इस विश्वविद्यालय में है.

नैक का निरीक्षण कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर सभी भवनों का रंग-रोगन और जीर्णोद्धार कराया गया, लेकिन शिक्षण व्यवस्था पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया. इस कारण कभी देश में अपनी शैक्षणिक गरिमा के लिए चर्चित रहे मगध विश्वविद्यालय को जब सी ग्रेड मिला तो बड़ी बदनामी हुई.इस दौरान शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के संघों ने भी मगध विश्वविद्यालयों के कुलपति समेत कई पदाधिकारियों के कार्यकलापों पर सवाल उठाये. लेकिन इनकी  आवाज प्रशासनिक दबाव में दबा दी गई. मगध विश्वविद्यालयों में छात्र-छत्राओं को अपनी पढ़ाई के लिए आन्दोलन करना पड़ता है. यहां छात्र के हितों की बात कम होती है. इसका प्रमाण है कि मगध विश्वविद्यालय सीनेट की बैठक 10 अप्रैल 2016 को विश्वविद्यालय मुख्यालय से बाहर राजगीर में कराया गया. जिसमें के लाखों रुपये बेमतलब खर्च हुआ. कारण यह था कि विभिन्न छात्र संगठनों ने दलीय भावना से हटकर छात्रहित की बात करने और अपनी विभिन्न मांगों को सीनेट की बैठक के दौरान उठाने की बात की थी. छात्रों द्वारा अपनी मांगों को लेकर हंगामे से बचने के लिए राजगीर में सीनेट की बैठक करायी गयी. यह बात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, छात्र समागम तथा अन्य छात्र संगठनों के नेताओं ने कहीं. 44 अंगीभूत और ढाई सौ से अधिक संबंद्ध कॉलेजों वाले मगध विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भी भारी कमी है. कई अंगीभूत कॉलेजों के विभाग तो एक शिक्षक के सहारे ही चल रहे हैं. छात्रों की पढ़ाई के लिए मगध विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षकों की कमी को देखते हुए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा रही है. वहीं दूसरी ओर अंगीभूत कॉलेजों के व्याख्याता से लेकर प्रोफेसर तक अपने विभागों के क्लास को छोड़कर सेल्फ फाइनांस वाले व्यावसायिक पाठ्‌यक्रमों में ज्यादा रुचि दिखाते हैं. इस मामले पर यदि जांच की जाए तो गया कॉलेज के कई शिक्षक बेनकाब हो जाएंगे. इन सब से अलग मगध विश्वविद्यालय मुख्यालय में पदस्थापित पदाधिकारी अपने विभागों में आवंटित राशि को जल्द से जल्द वारा-न्यारा करने में लगे रहते हैं. इन दिनों मगध विश्वविद्यालय कई अनियमितताओें के कारण जांच के दायरे से गुजर रहा है. बिहार सरकार के निगरानी विभाग द्वारा मगध विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमियता की जांच की जा रही है. वहीं दूसरी ओर कई विदेशियोंं को बिना भारत आए ही पीएचडी की डिग्री दिए जाने का मामला भी जांच के घेरे में आ गया है. विकट स्थिति तब हो गई, जबकि मगध विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. कृतेश्वर प्रसाद ने राजभवन को पत्र लिखकर अपने ही अधिकारियों के अधिकार पर सवाल खड़ा कर दिया. प्रति कुलपति ने अपने पत्र में कुलाधिपति सह राज्यपाल को कहा कि मगध विश्वविद्यालय में वित्त परामर्शी को नजर अंदाज कर वित्तीय काम किये जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि वित्त परामर्शी के बिना सहमति व सलाह के ही कई प्रस्तावों को सिंडिकेट से पास करा दिया गया है. जो कि बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 12 की उपधारा 3, 6, 7 का उल्लंघन है. प्रति कुलपति द्वारा लिखा गया है कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव के द्वारा अधिनियम 12 ए की इपधारा 6 का हनन किया गया है. प्रति कुलपति ने लिखा है कि सिडिंकेट में कोई भी प्रस्ताव लाने से पहले वित्त परामर्शी से सलाह व अनुमति लेना अनिवार्य है. लेकिन ऐसा नहीं कर तथ्यों को छुपाते हुए प्रस्तावों को सिडिंकेट से पारित करा लिया गया. प्रति कुलपति ने कुलाधिपति से इस गंभीर मामले पर शीघ्र हस्तक्षेप करने की मांग की है. मगध विश्वविद्यालय से संबंद्ध कॉलेजों के संचालकों को भी मगध विश्वविद्यालय के पदाधिकरियों द्वारा प्रताड़ित करने का मामला भी सामने आते रहता है.

हालांकि  पिछले एक दशक में जो भी कुलपति आए, उनका एक ही मकसद रहा कि मगध विश्वविद्यालय में जमा राशि को कैसे खर्च किया जाए? हालांकि मगध विश्वविद्यालय की स्थिति जब बहुत ही दयनीय थी तो बीएन पाण्डेय कुलपति बनकर आये और यहां के माहौल को बेहतर बनाया. लेकिन बाद के दिनों में मगध विश्वविद्यालय अपने काले कारनामों के लिए चर्चा में आ रहा है और विभिन्न तरह के जांच के घेरे में हैं. यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि मगध विश्वविद्यालय में पठन-पाठन को छोड़कर बाकि सबकुछ हो रहा है.

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