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वाह रे शिक्षा विभाग, तीन साल नौकरी वाले केन्द्राधीक्षक और 23 साल नौकरी वाले वीक्षक!

लखीसराय : जिला शिक्षा विभाग के लिए वरीयता क्रम कोई महत्व नहीं रखता इसका उदाहरण मैट्रिक की परीक्षा के व्यवस्था में एक बार फिर देखने को मिला. जिले में इससे पहले भी कई बार पदाधिकारी वरीयता क्रम की अवहेलना करते आए है.
ताजा मामला के मुताबिक जिले के बालिका विद्यापीठ उपरी तल्ला परीक्षा केन्द्र पर तीन साल अपनी नौकरी पूरी करने वाले उच्च विद्यालय अलीनगर के शिक्षक योगेन्द्र महतो को केन्द्राधीक्षक बनाया गया है.
जबकि इसी परीक्षा केन्द्र पर 23 साल नौकरी पूरी करने वाली महिला विद्यामंदिर हाई स्कूल की शिक्षिका सुजाता रानी को वीक्षक बना दिया गया है. इससे उक्त शिक्षिका को अपने से कनीय शिक्षिक के अंडर में काम करना पड़ता है. जिससे उक्त शिक्षिका के मान सम्मान पर ठेस पहुंचा है. इस संबंध में लखीसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी से बात करने की कोशिश की गयी मगर बात नहीं हो सकी.
इससे पूर्व भी जिला में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा जुलाई महीने में जिले के मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापकों के पदस्थापन में वरीयता क्रम का उल्लंघन किया था. उन्होंने उस समय प्रखंडों में शिक्षको के वेतन निकासी के लिए बनाए गये निकासी व्ययन पदाधिकारियों के पदस्थापन में वरीयताक्रम को ताख पर रखकर पदस्थापन किया था.
उदाहरण स्वरूप उनके द्वारा वरीयता क्रम में चार नंबर पर 1980 में बहाल शिक्षक इन्द्र दीप सिंह सामान्य प्रधानाध्यापक व वरीयता क्रम में 54वे नम्बर पर 1996 में बहाल शिक्षक मृत्युंजय कुमार को बड़हिया प्रखंड का डीडीओ बनाया था. जिले के डीईओ यह जानकर भी अंजान हैं. जिले के शिक्षकों के मुताबिक वहां डीईओ साहब से ज्यादा डीपीओ साहब की ही चलती है.

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