बिहार शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक पर शिक्षकों से अवैध रूप से पैसे वसूलने का गंभीर आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड स्थित एक उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कार्यरत प्रधानाध्यापक पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षकों से सरकारी प्रक्रिया के नाम पर ₹300 प्रति शिक्षक की अवैध वसूली की। बताया जा रहा है कि यह पैसा संपत्ति विवरण और उपस्थिति से जुड़े कार्यों के लिए लिया गया, जबकि यह प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क होती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें प्रधानाध्यापक को शिक्षकों से पैसे लेते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आते ही शिक्षा विभाग की किरकिरी होने लगी और उच्च अधिकारियों ने संज्ञान लिया।
शिक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई
वीडियो के आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने प्रधानाध्यापक को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का नोटिस जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो निलंबन समेत कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। सरकारी सेवकों द्वारा इस तरह की अवैध वसूली सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर असर
इस तरह की घटनाएं न केवल शिक्षकों का मनोबल गिराती हैं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं। अभिभावकों और आम जनता के बीच भी इससे अविश्वास का माहौल बनता है।
निष्कर्ष
मुजफ्फरपुर का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की जरूरत है। अब सभी की नजरें शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।