बिहार सरकार द्वारा कराई गई व्यापक निगरानी जांच में राज्य के शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की सत्यता की परख की गई। जांच के दौरान लाखों शिक्षकों के दस्तावेजों का मिलान किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
📊 2912 फर्जी प्रमाण पत्र, 1707 मामलों में FIR
जांच में अब तक 2912 शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इन मामलों में 1707 शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है। कई मामलों में एक से अधिक फर्जी दस्तावेजों का उपयोग सामने आया है।
⚖️ हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई कार्रवाई
यह पूरी प्रक्रिया पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू की गई थी। जांच उन शिक्षकों पर केंद्रित है जिनकी नियुक्तियां 2006 से 2015 के बीच हुई थीं। कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी नियुक्तियों की जांच करने के निर्देश दिए थे।
🚨 संगठित गिरोह की आशंका
जांच एजेंसियों को संदेह है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए सरकारी नौकरी दिलाने वाला संगठित गिरोह लंबे समय से सक्रिय था। कुछ मामलों में एक ही संस्थान से बड़ी संख्या में फर्जी डिग्रियां जारी होने के संकेत मिले हैं।
🏛️ नौकरी खत्म होने के साथ कानूनी कार्रवाई
फर्जी पाए गए शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा सकती है। साथ ही संबंधित व्यक्तियों पर आपराधिक मुकदमे चलाए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया को और सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है।
📌 शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस मामले ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता और दस्तावेज सत्यापन को तकनीकी रूप से मजबूत करना बेहद जरूरी है।
🔎 निष्कर्ष
बिहार में शिक्षक प्रमाण पत्र जांच ने यह साफ कर दिया है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी नौकरी पाने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई तय है। यह कदम राज्य की शिक्षा प्रणाली को सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है।