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लॉकडाउन में फंसे निजी विद्यालय के शिक्षक, मुरझाया चेहरा
जिले में 200 से अधिक निजी विद्यालय लॉकडाउन में हैं बंद, बच्चों की पढ़ाई ठप
दो हजार से अधिक शिक्षकों को वेतन के लाले, आमदनी का दूसरा स्त्रोत भी बंद
संवाद सहयोगी, लखीसराय : कोरोना संक्रमण को लेकर जारी लॉकडाउन का
खामियाजा प्रतिदिन कमाने खाने वाले से लेकर आम आदमी तक को भुगतना पड़ रहा
है। इस कारण जिला अंतर्गत 200 से अधिक निजी विद्यालयों का संचालन बंद है।
ऐसे में फी जमा नहीं हो रही है। इससे प्रबंधन शिक्षकों को वेतन नहीं दे पा
रही है। करीब दो हजार से अधिक शिक्षकों को इस दौरान वेतन नहीं मिलने के
कारण उन्हें जीवनयापन करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किराए के मकान में रहने वाले निजी शिक्षकों की दिक्कत अधिक बढ़ गई है।
स्कूल के साथ ही होम ट्यूशन भी बंद है। इस कारण आíथक संकट से जूझ रहे हैं।
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उधार देने से मना कर रहे दुकानदार, दूधवाला मांग रहा पैसा मामूली वेतन
पर काम करने वाले शिक्षकों का लॉकडाउन में दुकानदारों ने भी साथ छोड़ दिया
है। अब उन्हें उधार का राशन नहीं मिल रहा है। दूधवाले का तगादा भी हो रहा
है। किराए के मकान में रहने वालों के लिए किराए का भी टेंशन है। इस
परिस्थिति में शिक्षक यह अपील कर रहे हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई के एवज में
अभिभावक बच्चों की फी अदा कर दें ताकि उनके माध्यम से उसकी दो जून की रोटी
का जुगाड़ हो जाए। फिलहाल विद्यालय खुलने का कोई आसार भी नहीं है। इस कारण
चिता दूर नहीं हो रही है। कोरोना के खौफ और वेतन के बिना सैकड़ों शिक्षकों
के चेहरे मुरझाए हुए हैं।
सरकारी विद्यालय के शिक्षकों को भी वेतन का इंतजार सरकारी विद्यालयों
के हड़ताली नियोजित शिक्षकों ने हड़ताल समाप्त कर विभागीय निर्देशानुसार
योगदान भी कर लिया है। लेकिन वेतन के लिए डीईओ और डीपीओ स्थापना कार्यालय
का चक्कर काटना पड़ रहा है। जिले के प्रारंभिक, माध्यमिक एवं प्लस टू
नियोजित शिक्षकों को अभी वेतन भुगतान नहीं हुआ है। प्रारंभिक नियोजित
शिक्षक संघ के नेता राकेश कुंदन और सत्यप्रकाश पासवान ने बताया कि हड़ताल
समाप्ति के बाद भी विभागीय पदाधिकारी वेतन भुगतान करने में आनाकानी कर रहे
हैं।