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सिर्फ एक चौथाई शिक्षकों के भरोसे चल रहा है पटना विश्वविद्यालय

देश के सातवें सबसे पुराने और बिहार के सबसे पुराने विश्वविद्यालय पटना विश्वविद्यालय में, विद्यार्थियों की संख्या तो बीते कुछ सालों में कई गुना बढ़ी लेकिन शिक्षकों की संख्या एक चौथाई रह गई है। यहां शिक्षकों के सृजित पद 810 हैं। मगर सिर्फ 224 शिक्षक काम कर रहे हैं।


पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. रणधीर कुमार सिंह कहते हैं-2006 में राज्य भर के विश्वविद्यालयों से इंटर की पढ़ाई समाप्त कराने का निर्देश दिया गया। लेकिन इस निर्देश को लागू कराया गया सिर्फ पटना विश्वविद्यालय में। 2006 में पटना विवि से इंटर की पढ़ाई समाप्त होने के साथ ही शिक्षकों के 115 पद सरेंडर कर दिए गए और सृजित पदों की संख्या 925 से घटकर 810 हो गई, जबकि 2006 के बाद दर्जनों वोकेशनल कोर्स शुरू हुए। अभी जिन शिक्षकों की नियुक्ति बीपीएससी कर रही है, उसके लिए कैबिनेट ने अप्रैल 2010 में ही अप्रूवल दिया था। लेकिन सात सालों में साढ़े सात सौ शिक्षक ही नियुक्त हो सके। प्रो. सिंह ने शिक्षक नियुक्ति की रफ्तार पर सवाल उठाते हुए कहा कि साढ़े तीन हजार शिक्षकों की नियुक्ति बीपीएससी को करनी है। और जिस रफ्तार से नियुक्ति हो रही है, उससे लग रहा है कि जब तक नियुक्ति पूरी होगी, करीब 4000 शिक्षक रिटायर हो जाएंगे। 

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