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शिक्षकों की जान आफत में डाल सरकार करा रही है काम

बांका। क्वारंटाइन सेंटर में ड्यूटी करने वाले तीन शिक्षक के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल लिया है। शिक्षकों ने कहा कि सरकार शिक्षकों की जान की दुश्मन बन गई है।


अगर शिक्षक संगठनों की बात मानी गई होती तो आज तीन शिक्षक कोराना पॉजिटिव नहीं होते। जब से शिक्षकों की ड्यूटी प्रवासी मजदूर की देखरेख में क्वारंटाइन सेंटर पर लगा, तभी से बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दिया है। इसके बाद आज तक शिक्षकों को न सुरक्षा किट मुहैया कराया गया न ही बीमा का लाभ दिया गया। इसका दुष्परिणाम दिखने लगा है। संघ के जिलाध्यक्ष पंकज कुमार ने कहा कि बौंसी प्रखंड के दिव्या पब्लिक स्कूल पर प्रतिनियोजित तीन शिक्षक एवं एक शिक्षक की पत्नी कोराना संक्रमण का शिकार हो गए हैं। कहा कि बिहार सरकर को न शिक्षकों के जान की कोई परवाह है न ही आम जनता की। जब कोराना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है तो सरकार चुनावी रैली और कार्यकर्ता सम्मेलन करने में व्यस्त हो गई है। सत्तारूढ़ पार्टी को सिर्फ वोट से मतलब है किसी कि जान की परवाह नहीं है। बिहार के शिक्षक सरकार के द्वारा ढाए जा रहे जुल्म का हिसाब समय आने पर जरूर लेगा। जिला अध्यक्ष ने मांग किया है कि पॉजिटिव शिक्षक एवं उनकी पत्नी का इलाज अच्छी तरीके से कराया जाए। इस मामले को लेकर बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद कौशल सिंह ने उच्च न्यायालय पटना में जनहित याचिका भी दायर किया है। 

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