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बायोमीट्रिक हाजिरी बना 'जी का जंजाल', शिक्षक हुए ऑन टाइम तो कक्षा से छात्र-छात्राएं नदारद

मुजफ्फरपुर, जेएनएन। कॉलेजों से विश्वविद्यालय तक बायोमीट्रिक हाजिरी जी का जंजाल बन गई है। जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह व्यवस्था लागू हुई अब मालूम चला कोई फायदा नहीं हुआ। अब शिक्षक ऑन टाइम हो गए तो कक्षा से छात्र-छात्राएं नदारद हैं। लिहाजा, गुरु जी के लिए पांच घंटे का समय काटना भारी पड़ रहा है। हालांकि, अधिकतर शिक्षक इसका भी काट निकाल बैठे हैं।

 समय पर हाजिरी लगाकर चल निकलते हैं। फिर तीन बजते-बजते हाजिरी बनाने की याद सताने लगती है। अधिकारी-कर्मचारियों की हाजिरी के लिए जुलाई में बायोमीट्रिक मशीनें लगाई गई हैं। जो लोग देर से आ रहे थे अब समय पर आते तो हैं मगर सिर्फ हाजिरी लगाने। तीन दिन तक देर से आने पर एक सीएल और उसके बाद देर से आने वालों के वेतन काटने का निर्देश है।
बच्चों की ली जाए बायोमीट्रिक हाजिरी

अब शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाए। उनकी बायोमीट्रिक हाजिरी बने। राजभवन ने भी कह रखा है कि बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए विश्वविद्यालय अपने यहां बायोमीट्रिक हाजिरी लगवाने पर विचार कर सकते हैं। रजिस्ट्रार व प्रॉक्टर जैसे बड़े पद पर रह चुके डॉ. विवेकानंद शुक्ला भी इसकी वकालत करते हैं। एलएस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय का भी इस बात के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि 75 फीसदी उपस्थिति तो अनिवार्य है अन्यथा फॉर्म नहीं भरा जाएगा। बावजूद, कक्षा में उपस्थिति नगण्य है।

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