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शिक्षकों के वकील बोले - शिक्षा की राशि खर्च नहीं कर पाती राज्य सरकार, कोर्ट ने प्रमाण मांगा

पटना. शिक्षक संघ के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार को कठघरे में खड़ा करने की खूब कोशिश की। वकील ने कोर्ट से कहा कि 3.56 लाख नियोजित शिक्षकों को समान वेतन के लिए आर्थिक संकट का सरकार बहाना बना रही है। शिक्षा मद में केंद्रीय राशि खर्च नहीं कर पाती है।
राशि हर साल लौट जाती है। इस पर कोर्ट ने कहा - पूरे प्रमाण के साथ बताएं, राशि कितना खर्च नहीं कर पाती है? समान काम समान वेतन मामले पर मंगलवार को 13वें दिन एक घंटे बहस के बाद भी सुनवाई अधूरी रही। अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी। न्यायाधीश एएम सप्रे और यूयू ललित की कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

राज्य स्तरीय स्नातकोत्तर प्लस टू शिक्षक संगठन की ओर से वरीय वकील सीए सुंदरम ने कहा कि किसने शिक्षकों को बहाल किया यह महत्वपूर्ण नहीं है। सभी शिक्षकों को समान काम का समय है, तो फिर समान वेतन क्यों नहीं? नियोजित शिक्षक एनसीटीई और आरटीई के अनुरूप हैं, इसलिए समान वेतन इनका अधिकार है। संघ के वकील ने बिहार सरकार के एसएलपी को खारिज करने की मांग कोर्ट से की। 2010 से पूर्व बहाल शिक्षकों को पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता नहीं है। नियोजित शिक्षकों का सरकार ने परीक्षा भी लिया है।

कोर्ट ने शिक्षक संघ के वकीलों से कहा कि जो बात पिछली बहस में लायी जा चुकी है, उसे दोबारा न लाकर नई बात करें। इसके लिए समय निर्धारित कर दिया जाए? इस पर परिवर्तनकारी शिक्षक संघ के वकील सलमान खुर्शीद ने कहा ठीक है। जब उनसे पूछा गया कि आप अपनी बात रखने में कितना समय लेंगे? इस पर कहा- डेढ़ घंटे में अपनी बात रख दूंगा।

इसके पहले कई बार केंद्र और राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट से कहा था कि समान वेतन देने की आर्थिक स्थिति नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से एटार्नी जनरल वेणु गोपाल ने कहा था समान वेतन देने में 1.36 लाख करोड़ का अतिरिक्त भार केंद्र सरकार को वहन करना संभव नहीं है। राज्य सरकार के वकील ने भी कहा था कि आर्थिक स्थिति नहीं कि 3.56 लाख नियोजित शिक्षकों को पुराने शिक्षकों के बराबर समान वेतन दे सके। सरकार ने पिछले 11 वर्षों में शिक्षकों 7 गुना से अधिक वेतन में बढ़ोतरी हुई। आगे भी बढ़ोतरी जारी रहेगी।

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